किसी से प्यार क्या करेंगे, हमें खुद से प्यार नहीं,
किसी पर ऐतबार क्या करेंगे, हमें खुद का ऐतबार नहीं।
अब तो सपने भी देखना छोड़ देंगे हम,
किसी हसीन हक़ीक़त का इंतज़ार नहीं।
किस्मत में थीं बुलंदियाँ, वो पहले ही निकल गईं,
अब किसी बुलंदी का मैं तलबगार नहीं।
किसी से प्यार क्या करेंगे, हमें खुद से प्यार नहीं,
किसी पर ऐतबार क्या करेंगे, हमें खुद का ऐतबार नहीं।
तोड़ा है जिन्होंने हौसला, अपने ही थे वो यार,
यही वजह है, किसी का मददगार मैं नहीं।
भीगी हुई आँखों में नमी न कोई देख ले,
इस तन्हा ज़िंदगी को उम्मीद-ए-यार नहीं।
किसी से प्यार क्या करेंगे, हमें खुद से प्यार नहीं,
किसी पर ऐतबार क्या करेंगे, हमें खुद का ऐतबार नहीं।
कुछ घड़ी का और है, यह सफ़र कट ही जाएगा,
प्रभात, मुझे हमसफ़र की कोई दरकार नहीं।
किसी से प्यार क्या करेंगे हमें खुद से प्यार नहीं
किसी पर एतबार क्या करेंगे हमें खुद का एतवार नहीं
अब तो सपने भी देखना छोड़ देंगे हम
किसी हसीन हकीकत का इंतजार नहीं
किस्मत में थी बुलंदिया वो पहले ही निकल गयी
अब किसी बुलंदी का मैं तलबगार नहीं
तोड़ा है जिन्होने हौसला अपने ही थे वो यार
यही वजह है किसी का मददगार मैं नहीं
भीगी हुई आंखों में नमी ना कोई देख ले
इस तन्हा जिंदगी को उम्मीद-ए-यार नहीं
कुछ घड़ी का और है यह सफर कट ही जाएगा
प्रभात मुझे हमसफर की कोई दरकार नहीं
No comments:
Post a Comment