Saturday, 16 May 2026

हुस्न की हर चाहत इश्क का अरमान है

हुस्न की हर चाहत इश्क का अरमान है
जमाना इश्क से, इश्क जमाने से,
बहुत अनजान है

चिलमन से हुस्न को झांक लेने दो‌
दिल में मचल रहा इश्क का तूफान है
इश्क से प्यार है इश्क  हमारी जान है
लंबा बडा किया हमने इश्क का इंतजार है
चिलमन ने हुस्न पर पहरा क्यों लगाया है 
बेताब इश्क हुस्न को ढूंढने आया है
बड़ा बेदर्द जमाना है इश्क तो फिर भी दीवाना है

हुस्न की हर चाहत इश्क का अरमान है
जमाना इश्क से, इश्क जमाने से,
बहुत अनजान है

इश्क और हुस्न कभी जुदा होते नहीं
जमाने के सितम से कभी रोते नहीं 
इश्क ने जमाने के पत्थर खाए हैं 
हुस्न की दुआओं में असर वो होता है 
पत्थर फूल बन जाते हैं 
मिटाने की चाहत में  इश्क को
जाने कितने   खुद बे खुद मिट जाते हैं जाते हैं
हुस्न के बिना इश्क, इश्क के बिना हुस्न बेजान है 

हुस्न की हर चाहत इश्क का अरमान है
जमाना इश्क से, इश्क जमाने से,
बहुत अनजान है



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