तू ना समझे मेरे इशारे
तू ना जाने, क्या मुझे हो गया
तेरी ये सूरत दिल में उतर गई
मुझे इश्क का नशा हो गया
तूने मुझको रोग ये लगा दिया
तेरे आगे पीछे घूमती हूं मैं
तेरा नाम लिखकर
अपनी हथेली पर
बार-बार चूमती हूं मैं
मेरे लिए तू अपना सा हो गया
तू ना समझे मेरे इशारे
तू ना जाने, क्या मुझे हो गया
तेरी ये सूरत दिल में उतर गई
मुझे इश्क का नशा हो गया
बाट तेरी रोज मैं निहारू
सपनों में तेरा नाम पुकारू
तेरी आरजू अब मेरा सपना
तुझको ही चाहना तेरे ही चाहत
तेरे लिए ही सजना मुझको
तू अब मेरा सजना हो गया
तू ना समझे मेरे इशारे
तू ना जाने, क्या मुझे हो गया
तेरी ये सूरत दिल में उतर गई
मुझे इश्क का नशा हो गया
मैं ढूंढती हूं तुझको यहां वहां
पर तू मुझे मिलता कहां
तेरा ठिकाना तो मेरा दिल है
तू दिल से अब निकलता कहां
मेरे दिल की प्यासी तमन्ना
मेरे सनम अब तू हो गया
तू ना समझे मेरे इशारे
तू ना जाने, क्या मुझे हो गया
तेरी ये सूरत दिल में उतर गई
मुझे इश्क का नशा हो गया
No comments:
Post a Comment