Wednesday, 1 April 2026

हम अपने साये से भी बेहद दूर हुए।

इस कदर जिंदगी से मायूस हुए,

हम अपने साये से भी बेहद दूर हुए।

लोग तो मरने के बाद जलते हैं,

हम हैं कि जीते जी जलने को मजबूर हुए।

​इस शहर में तेरे आकर हम,

पहले बाद फिर बाद में बदनाम हुए।

याद करके बीते हुए अपने कल को हम,

बेबसी में बस आंसू बहाने को मजबूर हुए।

​यूं तो अनजाने भी अपने बन जाते हैं,

हम अपनों के साये से बड़ी दूर हुए।

खबर क्या थी कि हम एक दिन होंगे उस मोड़ पे,

महज एक खुशी के लिए जब मोहताज हुए।

​गम भरे होते नहीं लोग बनाते हैं उन्हें,

मेरे गम ही हैं जिनके साये में जीने को मजबूर हुए।

आज उनको भी सूरत और दौलत की चाह थी,

हमने अपनी हर खुशी दे दी फिर भी दूर हुए।

​एक चाँद सितारे दूर तक खामोश फलक था,

जिनके साये में रहने को हम मजबूर हुए।

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