Monday, 27 April 2026

ज़िंदगी यूं ही तन्हा गुज़र जाती है।(मेरी कहानी)

[Intro – Soft Piano / Ambient]

छोटी सी ख्वाहिश भी दिल की पूरी होती नहीं,

ज़िंदगी यूं ही तन्हा गुज़र जाती है...

जाने क्यों लगता है जैसे ठहर जाती है,

सुनसान वीराने में... बस सांसों की आवाज़ आती है...

[Hook / Chorus]

कैसा है ये ज़िंदगी का सफ़र...

हर मोड़ पे तन्हाई का असर...

चलते रहे, पर पहुंचे नहीं कहीं,

कैसा है ये ज़िंदगी का सफ़र...

[Verse 1]

हमने सोचा भी न था ऐसा भी कभी हो जाएगा,

एक खुशी की खातिर ये दिल यूं तरस जाएगा...

अपने भी छोड़ देंगे, गैर भी साथ न निभाएंगे,

खुद को हम ज़िंदगी के ऐसे चौराहे पर पाएंगे...

[Pre-Chorus]

अब ना कोई हमसफ़र, ना कोई रहबर...

[Chorus Repeat]

कैसा है ये ज़िंदगी का सफ़र...

हर मोड़ पे तन्हाई का असर...

[Verse 2]

ये रास्ते इतने लंबे क्यों हैं, कब तक और क्यों चलें...

जो दिल से मिले थे कभी, वो पीछे ही छूट गए...

किस्मत को शायद यही मंज़र दिखाना था,

हम दोराहे पर खड़े, बस देखते ही रह गए...

[Pre-Chorus]

सपनों का हर घर गया बिखर...

[Chorus Repeat – High Emotion]

कैसा है ये ज़िंदगी का सफ़र...

हर मोड़ पे तन्हाई का असर...

[Bridge – Deep Emotional]

अपनों ने दामन छुड़ा लिया, हम खुद से भी दूर हो गए...

एक कशिश थी दिल में दबी, हम खामोश ही रह गए...

[Outro – Slow Fade]

वीराने ही घर बन गए, बस इतनी सी खता थी...

जख्म तो दिखे नहीं मगर... गहराई में दर्द रहा...

कैसा है ये ज़िंदगी का सफ़र...

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