मुखड़ा:
रसीले होठों में अंगूर का रस बड़ा भरा
चूस ले सैया क्या सोचे खड़ा-खड़ा
अन्तरा 1:
नज़रों की बिजली गिराऊं मैं तुझ पर,
पास मेरे आज सैया मुझसे डरना क्या
प्यासी है दिल की धड़कन,
प्यासा प्यासा है मेरा यौवन
मेरी प्यास नहीं बुझाएगा क्या
जाम मोहब्बत का तू ही तो भरेगा!
मुझसे मोहब्बत तू भी तो करेगा
तभी तो आएगा मजा बड़ा
क्या सोच सैया खड़ा खड़ा
रसीले होठों में अंगूर का रस बड़ा भरा
चूस ले सैया क्या सोचे खड़ा-खड़ा
अन्तरा 2:
मेरी बिंदिया भी चमक रही है
लाल लाल गालों पर लाली बड़ी है
तन बदन में अगन लगी है
तुझे सजना प्रीत लगी है
प्रीत का दामन ना मुझसे छुड़ा
रसीले होठों में अंगूर का रस बड़ा भरा
चूस ले सैया क्या सोचे खड़ा-खड़ा
अन्तरा 3:
सावन का महीना है खूब बरसेगा पानी
फिर भी प्यासी रहेगी क्या मेरी जवानी
देख ले सैया मत कर आना कानी
कहते है लोग चार दिन रहती है जवानी
देख ल सैया शमा है नशीला बड़ा
क्या सोचे तू खड-खड़ा
रसीले होठों में अंगूर का रस बड़ा भरा
चूस ले सैया क्या सोचे खड़ा-खड़ा
No comments:
Post a Comment