Sunday, 5 April 2026

देखो सावन का मौसम है मुझको बस ये गम है।

[मुखड़ा:]

देखो सावन का मौसम है,

मुझको बस ये गम है।

सनम तू पास नहीं,

मुझसे दूर क्यों है?

​[अंतरा 1:]

आजा सनम अब तो आजा,

दिल की ये आग बुझा जा।

बहाना कोई चलेगा नहीं,

तुझको आना ही पड़ेगा,

दिल को समझाना ही पड़ेगा।

नींदें खोई, चैन गवाया,

रातों को मैं भी न सोई।

दिल भी तड़प रहा है,

मैं भी तड़प रही हूँ,

आकर मुझे समझा जा तू,

ये कैसा दस्तूर है?

(देखो सावन का मौसम है...)

[​अंतरा 2:]

जाने क्यों हम बेबस हैं,

ये कैसी बेबसी है?

तपती है ये तन-बदन,

विरह की कैसी आग लगी है।

तू कितना मजबूर है,

पर क्यों हमसे दूर है?

(देखो सावन का मौसम है...)

​[अंतरा 3:]

हमको यादें तेरी सताती हैं,

रातों को नींद नहीं आती है।

तू नासमझ तो नहीं है,

धड़कनें तेरे गीत गाती हैं।

ये हवाएं संग आग लाती हैं,

हमको जलाती हैं,

तू इतना मजबूर क्यों है?

(देखो सावन का मौसम है...)

​[अंतरा 4:]

कैसे कटें ये जवानी की रातें,

किससे करें हम दिल की बातें?

तू भी यहाँ पास नहीं है,

दिल पर हमारा जोर नहीं है।

तू इतना हमसे दूर क्यों है,

सनम तू मजबूर क्यों है?

[​समाप्ति:]

देखो सावन का मौसम है,

मुझको बस ये गम है।

सनम तू पास नहीं,

मुझसे दूर क्यों है

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