काहे घूरे ऐसे मुझको नजरों से
तेरी रपट थाने में करा दूंगी
दिल तुझे नहीं दूंगी
आते जाते तू छेडे मुझको
तंग करके रख दिया तूने मुझको
अंखियों से जाने क्या कह जाए
मेरी समझ में कुछ भी ना आए
अपने बापू से शिकायत लगा दूंगी
तुझे हवा लात करा दूंगी
दिल तुझे ना दूंगी
रोज ही घूमे मेरे आगे पीछे
कभी गली मेंरी कभी मंदिर के पीछे
रोज ताक में खड़ा क्यों होता
मेरे घर के सामने पीपल के नीचे
तेरे बापू को सारी बात बतादूंगी
दिल तुझे नहींदूंगी
घुमा फिरा के तू जो बताए
पल्ले पड़े ना समझ ना आए
सीधे-सीधे कह दे जो तू चाहे
बात तो दिल में क्यों है छुपाए
अपने दिल की तुझे बता दूंगी
दिल तुझे ही दूंगी
[स्पोकन वर्ड]
हाय दइया मैंने यह क्या कह दिया
पता नहीं चला दिल तुझको दे दिया
[Verse]
अपनी रपट वापस कर लूंगी
दिल तुझको ही दूंगी
तेरी अखियों से अखियां लड़ा लूंगी
दिल तुझको ही दूंगी
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