Friday, 17 April 2026

रपट थाने में करा दूंगी

काहे  घूरे ऐसे मुझको  नजरों से 
तेरी रपट थाने में करा दूंगी 
 दिल तुझे नहीं दूंगी 

 आते जाते तू छेडे मुझको
तंग करके रख दिया तूने मुझको 
अंखियों से जाने क्या कह जाए 
मेरी समझ में कुछ भी ना आए 
अपने बापू से शिकायत लगा दूंगी
तुझे हवा लात करा दूंगी 
दिल तुझे ना दूंगी 

रोज ही घूमे मेरे आगे पीछे 
कभी गली मेंरी कभी मंदिर के पीछे
रोज ताक में खड़ा क्यों होता 
मेरे घर के सामने पीपल के नीचे 
तेरे बापू को सारी बात बतादूंगी 
दिल तुझे नहींदूंगी 

घुमा फिरा के तू जो बताए 
पल्ले पड़े ना समझ ना आए 
सीधे-सीधे कह दे जो तू चाहे 
 बात तो दिल में क्यों है छुपाए 
अपने दिल की तुझे बता दूंगी 
दिल तुझे ही दूंगी 
[स्पोकन वर्ड]
हाय दइया मैंने यह क्या कह दिया
पता नहीं चला दिल तुझको दे दिया 
[Verse]
अपनी रपट वापस कर लूंगी 
दिल तुझको ही दूंगी 
तेरी अखियों से अखियां लड़ा लूंगी
दिल तुझको ही दूंगी

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