Wednesday, 15 April 2026

चाहत के इन अफसानों में

चाहत  के इन अफसानों में
महफिल के इन दीवानों में 
सबके अरमानों में 
आज की रात होंगे 
 बस तू और मैं
ये जो सजी है महफिल 
इतनी हंसी यह महफिल 
इस महफिल को जिसकी जरूरत है
वो मेहमान है बस  तू और मैं

हर तरफ होंगे हमारे ही फ़साने
सबके होंठ गाएंगे हमारे ही तराने

मिलने के ढूँढेंगे बहाने लेकर प्यार की चाहत
मेरा दीवाना है तू
तेरी दीवानी हूँ मैं
उनको नहीं मिलेगी राहत
ढूंढेंगे वो प्यार की चाहत
सबकी नज़रों में होंगे
बस तू और मैं

चाहत  के इन अफसानों में
महफिल के इन दीवानों में 
सबके अरमानों में 
आज की रात होंगे 
 बस तू और मैं

रौनक़ें छाई हैं महफ़िल में
जल रही है शमाऐ
परवाने भी इधर-उधर मंडराते हैं
उनको जला रही है शमाऐ
फिर भी महफ़िल अधूरी है
तेरे और मेरे बिना
सबको दीवाना बना देगी 
मेरे हूस्न की अदाएं
आज की रात अपनी है
बाहों में लेकर बाहे
इस महफिल को सजाएंगे
बस तू और मैं

ये जो सजी है महफिल 
इतनी हंसी यह महफिल 
इस महफिल को जिसकी जरूरत है
वो मेहमान है बस  तू और मैं

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