जाने कितने अन्जाने
बातों ही बातों में
चंद मुलाकातो में
रात दिन मेरे सपने देखते हैं
सामने पड़ जाऊं तो मुझे रोकते हैं
टेढ़ी टेढ़ी नजरों से मुझे घूरते हैं
सुनाते हैं अपने अफसाने
बन जाते है मेरे दीवाने
मेरे हसीन हुस्न का नशा
उन पर छा जाता है
उनका मासूम दिल
धोखा खा जाता है
मेरी जुल्फों के जाल में
फसके रह जाते हैं
क्या करूं मैं उन पर
तरस भी मुझे आता है
नशा.... नशा.... नशा
मेरे हुस्न का नशा
उनको कोई मौका नहीं देता
हुस्न मेरा उनको कोई धोखा नहीं देता
फिर भी वो बन जाते हैं
खुद से बेगाने
जाने कितने अन्जाने
बातों ही बातों में
चंद मुलाकातो में
बह जाते जज्बातों में
लेके मेरा हाथ अपने हाथों में
सुनाते हैं अपने अफसाने
बन जाते है मेरे दीवाने
उनकी चाहत है
प्यार मेरा मिल जाए
मेरी एक नजर की
इनायत मिल जाए
देखते हैं सपने वो
दिन रात मेरे सपने
उनके सपनों की
शहजादी मैं बन जाती हूं
मुझे भी प्यार होता है
पर डर भी लगता है
कोई कोई आशिक
सिर फिरा भी होता है
मैं बच के निकलती हूं
वो सामने से आते हैं
नजरों से मेरी नजर
अपनी लड़ाते हैं
फिर बन जाते हैं वो
खुद अपनेसे अनजाने
जाने कितने अन्जाने
बातों ही बातों में
चंद मुलाकातो में
बह जाते जज्बातों में
लेके मेरा हाथ अपने हाथों में
सुनाते हैं अपने अफसाने
बन जाते है मेरे दीवाने
कुछ तो मेरे पीछे-पीछे घर तक आते हैं
ऐसे दीवाने सिरदर्द बन जाते हैं
भूल जाते हैं खाना पीना सोना
उनका तो बस एक मैं हूं खिलौना
मेरे घर के सामने ही सो जाते हैं
होता नहीं उनका कोई बिस्तर बिछौना
आशिकों की बस्ती में मैं रहती हूं
बहुत से हैं मेरे जाने पहचाने
जाने कितने अन्जाने
बातों ही बातों में
चंद मुलाकातो में
बह जाते जज्बातों में
लेके मेरा हाथ अपने हाथों में
सुनाते हैं अपने अफसाने
बन जाते है मेरे दीवाने
No comments:
Post a Comment