अमन का पैगाम है हम और मोहब्बत नाम है,
तरक्की कनिज़ है हमारी और सांईस भी गुलाम है।
जुल्म बहुत सह चुके अब है मुकाबला होगा शमशीर से,
बेदखल अब हम करेंगे तुमको अपने कश्मीर से।
अमन का पैगाम है हम और मोहब्बत नाम है,
तरक्की कनिज़ है हमारी और सांईस भी गुलाम है।
पहचानते और जानते है कितनी तुम्हारी औकात है,
पल रहे हो जिसके सहारे मिल रही अभी खैरात है।
रोटी भी मुकद्दस कहां अब घर भी छीन जायेगे,
अमन का पैगाम है हम और मोहब्बत नाम है,
तरक्की कनिज़ है हमारी और सांईस भी गुलाम है।
आतंकी तिजारत छोड दो वरना,
ख्वाहिशें हमारी वेलगाम है।
अमन का पैगाम है हम और मोहब्बत नाम है,
तरक्की कनिज़ है हमारी और सांईस भी गुलाम है।
आतंकियो को पालते हो,
तुम अपनी गोद में,
भारत मां के पहरी जागते हैं,
घूमते तुम्हारी खोज में।
अमन का पैगाम है हम और मोहब्बत नाम है,
तरक्की कनिज़ है हमारी और सांईस भी गुलाम है।
तरक्की कनिज़ है हमारी और सांईस भी गुलाम है।
अमन के हम पुजारी हैं,
आंखें दिखाना छोड़ दो।
हर खामोशी बोलती है इक दिन,
अब तो आजमाना छोड़ दो।
अमन का पैगाम है हम और मोहब्बत नाम है,
तरक्की कनिज़ है हमारी और सांईस भी गुलाम है।
तरक्की कनिज़ है हमारी और सांईस भी गुलाम है।
भारत माता की तरक्की ,
देख दुनिया सारी रही।
हम चांद पर पहुंचे वहां,
जहां आज तक कोई पहुंचा नहीं।
अमन का पैगाम है हम और मोहब्बत नाम है,
तरक्की कनिज़ है हमारी और सांईस भी गुलाम है।
तरक्की कनिज़ है हमारी और सांईस भी गुलाम है।
जो भीख मिलती तुम्हें है,
काम अब आएगी नहीं
करोड़ निगाहें जागती है
धोखा कोई अब खाएंगी नहीं
अमन का पैगाम है हम और मोहब्बत नाम है,
तरक्की कनिज़ है हमारी और सांईस भी गुलाम है।
तरक्की कनिज़ है हमारी और सांईस भी गुलाम है।
अब तुम्हारी खैरियत है, अपने घर में ही रहो।
प्रभात कह रहा है यही, मत सिंदूर से जलकर मरो।
अमन का पैगाम है हम और मोहब्बत नाम है,
तरक्की कनिज़ है हमारी और सांईस भी गुलाम है।
तरक्की कनिज़ है हमारी और सांईस भी गुलाम है।
गणतंत्र दिवस अमर रहे।
भारत माता की जय।
No comments:
Post a Comment