[Spoken word]
शीर्षक-कवि हृदय से उद्घोष
संदेश मानवता का सुनाने
मैं लेकर आया भाव
सहृदय मुझे खेद है
यदि हो संभाव्य अभाव
हो संभाव्य अभाव हृदय से हूं क्षमा प्रार्थी
काव्य की प्रथम पाठशाला का मैं हूं विद्यार्थी
छंदों और मात्राओं का भी नहीं ज्ञान जरा सा
किंतु मन में है असीम
कवि बनने कीअभिलाषा
उत्सुख हूं कवि बनने को संग है मेरी कल्पना
नित्य सजाता जिन्हे
वे लौकिक अल्पना
जो मैंने सजाई मात्र मानव की कल्पना है
अभिव्यक्ति आदर्शो और मानव की वंदना है
ध्येय मेरा है प्रेषण संदेश प्रेम का
मैं पुतला हूं एकमात्र बन्ना राष्ट्र प्रेम
उद्घोष विश्व शांति का
मेरी कल्पना का है सार
वसुधैव कुटुंबकम से निर्मित
संसार मेरा और मेरा आचार
आस्तिक हूं ना फिर भी
ईश्वर में ध्यान लगाता
मेरा ईश्वर है मनुज
सबको मैं यही बताता
मैं नमन करता और कर रहा
आपके यश का गान
मात्र मुझे चाहिए आपसे
आपके इसने का वरदान
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