एक गांव है मेरे सपनों का
नित लगता मेला अपनों का
कुछ भूले बिसरे मिल जाते हैं
जिन्हें देखकर हम हर्षाते हैं
एक गांव है मेरे सपनों का.....
इस मेले में एक उपवन है
जिसमें फूल लगे हैं शांखो पर
कुछ भवरे उन पर गुंजार रहे
कुछ तितलियां में मडराती उन पर
एक गांव है मेरे सपनों का
मेरे मेले में एक नदियां है
जो दूर कहीं तक जाती है
कुछ अनकही बातें ऐसी हैं
जो मुझे सुनाती जाती है
एक गांव है मेरे सपनों का
मेरे मेले में ना कोई अकेला है
सब साथ साथ ही रहते हैं
सब दुख सुख के साथी हैं
अब अपना मुझको कहते हैं
एक गांव है मेरे सपनों का
नित्य नूतन किरणों से चमकता है
अवर्णित है यह बातों में
यह गांव बसा मेरी आंखों में
कुछ है न्यारा ये लाखों में
एक गांव है मेरेसपनों का
जहां मानवता का वास है जहां हर ओर सिर्फ प्रसन्नता है,
जहाँ स्वार्थ नहीं फलते के फूलते, सिर्फ बहती प्रेम की गंगा है
एक गांव है मेरे सपनों का
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