Monday, 9 February 2026

मुझे कुछ ना कहना मैं लडखडाने लगा हूं

​मैं साक़ी तेरे पास आने से घबराने लगा हूँ,

मैं साक़ी तेरे पास आने से घबराने लगा हूँ।

​मुझे कुछ ना कहना मैं लड़खड़ाने लगा हूँ,

मुझे कुछ ना कहना मैं लड़खड़ाने लगा हूँ।।

​(1)

​मय और मयकशी बन गई बेबसी थी,

मय और मयकशी बन गई बेबसी थी।

​कि दस्तूर  वफा के निभाने लगा हूँ,

कि दस्तूर  वफा के निभाने लगा हूँ।।

​(2)

​मयकश तो बहुत हैं मैं अकेला नहीं हूँ,

मयकश तो बहुत हैं मैं अकेला नहीं हूँ।

​मैं ही अब सबकी नज़रों में आने लगा हूँ,

मैं ही अब सबकी नज़रों में आने लगा हूँ।।

​(मुखड़ा - दोहराव)

​मैं साक़ी तेरे पास आने से घबराने लगा हूँ,

मैं साक़ी तेरे पास आने से घबराने लगा हूँ।

​मुझे कुछ ना कहना मैं लड़खड़ाने लगा हूँ,

मुझे कुछ ना कहना मैं लड़खड़ाने लगा हूँ।।

​(3)

​शोर बढ़ गया है महफ़िलों में इस कदर,

शोर बढ़ गया है महफ़िलों में इस कदर।

​कि महफ़िलों से अब घबराने लगा हूँ,

कि महफ़िलों से अब घबराने लगा हूँ।।

​(4)

​हँसती है दिल के ज़ख्मों पे बेदर्द ये दुनिया,

हँसती है दिल के ज़ख्मों पे बेदर्द ये दुनिया।

​मैं अपनी हँसी आँसुओं में डुबोने लगा हूँ,

मैं अपनी हँसी आँसुओं में डुबोने लगा हूँ।।

​(मुखड़ा - दोहराव)

​मैं साक़ी तेरे पास आने से घबराने लगा हूँ,

मैं साक़ी तेरे पास आने से घबराने लगा हूँ।

​मुझे कुछ ना कहना मैं लड़खड़ाने लगा हूँ,

मुझे कुछ ना कहना मैं लड़खड़ाने लगा हूँ।।

​(5)

​साँसों पे बोझ सी लगती हैं यादें तेरी,

साँसों पे बोझ सी लगती हैं यादें तेरी।

​दिलो-दिमाग से तेरी यादें मिटाने लगा हूँ,

दिलो-दिमाग से तेरी यादें मिटाने लगा हूँ।।

​(6)

​यक़ीन अब नहीं है मोहब्बत का मुझको,

यक़ीन अब नहीं है मोहब्बत का मुझको।

​मैं नफ़रत की गलियों में जाने लगा हूँ,

मैं नफ़रत की गलियों में जाने लगा हूँ।।

​(मुखड़ा - दोहराव)

​मैं साक़ी तेरे पास आने से घबराने लगा हूँ,

मैं साक़ी तेरे पास आने से घबराने लगा हूँ।

​मुझे कुछ ना कहना मैं लड़खड़ाने लगा हूँ,

मुझे कुछ ना कहना मैं लड़खड़ाने लगा हूँ।।

​(7)

​महबूब की गलियों को भी मैं भूल जाऊँ,

महबूब की गलियों को भी मैं भूल जाऊँ।

​इसी आरज़ू से तेरे दर पर आने लगा हूँ,

इसी आरज़ू से तेरे दर पर आने लगा हूँ।।

​(मक़्ता - अंतिम शेर)

​'प्रभात' एक पैगाम अब तुझको दे रहा हूँ,

'प्रभात' एक पैगाम अब तुझको दे रहा हूँ।

​मैं बेबस हूँ, तुझसे नज़दीकियाँ बढ़ाने लगा हूँ,

मैं बेबस हूँ, तुझसे नज़दीकियाँ बढ़ाने लगा हूँ।।

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