Monday, 23 February 2026

बड़ी भोली थी वो सोने की चिड़ियां

[Intro piano and Guitar slow fusion]
बड़ी भोली थी वो सोने की चिड़ियां
जिसे कैद किया था पिंजरे में 
पर नोचे जितने नोच सका 
व्यवसायी बन फिरंगी ने 
[व्यंग पूर्ण वाणी में स्पष्टता के साथ]
बड़ी तिरछी थी उनकी चालें 
हम भी थे बड़े भोले भाले 
कुछ सस्ता था जो  मिलता था 
सब उद्योग हमने डुबो डाले 

अपने घर में ही बेगाने थे 
पड़े अपमान उठाने थे 
यह बात  कल की ही है 
नहीं वो पुराने जमाने थे 
रक्त तन से हमारे निचोड़ा था 
तब ही फिरंगी ने छोड़ा था 
राष्ट्रभक्ति ह्रदय में बसती थी 
जीवन साधन बहुत थोड़ा था 
[गर्व पूर्ण वाणी में बोले]
दृढ इच्छा शक्ति के कारण ही 
उच्च शिखरों तक हम आए हैं 
जहां सुई भी विदेशी थी 
मिसाइल हमने बनाए हैं 
[चेतावनी पूर्ण शब्दों में दो बार बोले]
कोई आंख उठा के ना देखें 
वो साधन आज हमारे हैं 
परमाणु पर विजय हमारी है 
अंतरिक्ष भी आज हमारे हैं 
[विश्वास और जोश के साथ]
प्रगति के पथ पर चलते चलते
पग में भी छाले पड़ते रहे
फिर भी ना रुके हम इस पथ में 
बस आगे ही आगे  बढ़ते रहे 
परिपक्व भौतिकता का जादू 
आज फिर  से लगा है छाने
सावन के मेघ फिर आए हैं 
अब लगे नोट हैं बरसाने 
[ पूर्ण जोश क साथ]
ज्ञान बड़ा और विज्ञान बड़ा 
राष्ट्र का  अब सम्मान बड़ा 
चरम शिखर पर हम पहुंचे हैं 
विश्व नेतृत्व की और हाथ बड़ा 
[ग्रुप ग्रुप में आवाज के साथ ]
मिलकर अब हम सब को अपने 
अधिकारों का लुफ्त उठाना है 
संगठित अभिव्यक्ति हो इच्छा की 
सोपान अभी वह भी आना है 
[पहले दो लाइन पुरुषकी आवाज में चाचा बात की दो लइनमहिला की आवाज में]
 एक हित में निहित हो सबका हित 
 विस्मित ना हो हमें  परहित 

सदा सचेत्त रहे सदा याद रहे 
हमें राष्ट्र और हमारा राष्ट्रहित 

हम साधक हो आराधक हो 
मानवता के मुखर उपासक हो 

प्रयत्न हमारे उन्हें दूर करें 
प्रगति पथ के जो बाधक हो 
विश्व शांति ध्येय हमारा हो 
सारा जग हमको प्यार हो 

अंधेरा ना रहे धरा पर शेष कहीं 
घर-घर में ज्योति का उजियारा हो 
[स्त्री और पुरुष साथ-साथ गाएंगे]
 नवयुवक बने सच्चे सेवक 
जीवन आधार उन्हें दे दो 
ऐसी शिक्षा जो विचारों की 
रोजगार अपार उन्हें दे दो 
जग जान चुका पहचान चुका 
विश्व ताज बनेगा मेरा भारत 
अध्यात्म और भौतिक धरातल पर 
नित आगे बढ़ेगा मेरा भारत





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