कब तू सनम
बन के दुल्हनिया आएगी
प्यार में पहली बार
तूने किया था वादा
तू अपना वादा कब निभाऐगी
अपने मिलन की रात अधूरी है
ऐसी भी क्या सनम मजबूरी है
पास हो उतना जितनी ये सांसे
फिर भी क्यों इतनी दूरी है
याद तेरी जब आएगी
तन मन में आग लगाएगी
सपनों की पालकी में
कब तू सनम
बनके दुल्हनिया आएगी
ऐसी भी क्या सनम मजबूरी है
बिन तेरे जीना भी है
एक मजबूरी है
सांसों का ये आना जाना
सिर्फ एक है बहाना
ये सांसे भी कब तक आएगी
सपनों की पालकी
कब तू सनम
बन के दुल्हनिया आएगी
सुन के पुकार तेरी
आई है दुल्हनिया तेरी
वादा वो अपना निभाएगी
जब तक चलेगी सांसे
तुझको अपना बना के
पिया अंगना तेरा सजाएगी
कई जन्मों से
मैं हूं प्यासी
प्रेम की साजन तेरे
मैंने भी हर जन्म
मिलने को तुझसे
लगाये जाने कितने फेरे
इस जन्म में
तेरी दुल्हनिया
तेरा साथ निभाएगी
अपने मिलन की
रात ये पूरी होगी
नहीं सनम कोई
अब मजबूरी होगी
बीच में तेरे मेरे
नहीं कोई दूरी होगी
गीत की प्यार का
ये बहारे गाएगी
चांदनी रात मे
तेरे मेरे साथ में
तारो की बारात सज जाएगी
जन्मो की प्यास मिट जाएगी
अपने मिलन की
रात ये पूरी होगी
नहीं सनम कोई
अब मजबूरी होगी
बीच में तेरे मेरे
नहीं कोई दूरी होगी
जन्मो की प्यास मिट जाएगी
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