1-मुझे वक़्त से समझौता करना नहीं आता,
वह भी बड़ा बेदर्द है, मेरे बुरे वक़्त पर नहीं आता।
मैं हर रोज़ उसे अपने सामने से गुज़रते देखता हूँ,
वह भी ज़िद्दी है, कभी रुककर मेरे पास नहीं आता।
2-वो जब भी मेरे जहन में ख्याल बनकर आई है
एक खामोशी से भरा सवाल बन के आई है
अगरचे वो चाहती तू तमाम खुशियां दे सकती थी
मगर वह मेरे लिए सिर्फ यादो में लिपटे गम लई है
3-अब वो सवाल है जिसका कोई जवाब नहीं मिलता,बस एक कसक है जो यादों के लिबास में लिपटी है।"(ai)
4-हंस मत रुक जा जरा सुन तो ले
हसमत रुक जा जरा सुन तो ले
हंसने वालों से दुनिया खफा हो जाती है
क्या-क्या कसीदे पढ़ते है जमाने वाले
अनजाने में ही हंसना बड़ी खता हो जाती
हंस मत, रुक जा, ज़रा सुन तो ले,
हसमत रुक जा, ज़रा सुन तो ले।
हंसने वालों से दुनिया खफा हो जाती है,
क्या-क्या कसीदे पढ़ते हैं ज़माने वाले,
अनजाने में ही हंसना, बड़ी खता हो जाती है।
दुनिया की बंदिशों से ज़रा लम्हे उधार लेता हूँ,
अपनी तन्हाई में बैठ कर, मैं खुद को संवार लेता हूँ।"
हमने तो काँच की मानिंद, खुद को आईना बनाया था,
हमें क्या खबर थी कि सामने पत्थर का साया था।"
"चेहरे की मासूमियत पर, सदके ज़माना हुआ,
भीतर जो पत्थर छुपा था, वो सिर्फ हमारा हुआ।"
है
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