Saturday, 28 February 2026

जिंदगी के इस सफर में लोग अनजाने भी मिलते हैं,

जिंदगी के इस सफर में लोग अनजाने भी मिलते हैं,

इन अनजानों में कभी ना कभी अपने भी मिलते हैं।

​मंजिलें ऐसी भी होती हैं जिनके कोई रास्ते नहीं होते,

फिर भी तन्हा मुसाफिर उनका दम भरते हैं।

​बात हौसलों की हो हर शय भी हमराह होती है,

परिंदे तो  आसमानोंंं के पार भी उड़ान भरते हैं।

​जिंदगी केेे लिए सिर्फ खुशियां ही जरूरी तो नहीं,

फिर क्यों इन गमों को अपने से दूर करते हैं।

​इस दुनिया को छोड़िए ये तो तन्हा छोड़ देती है,

हम फिर क्यों किसी कारवां का इंतजार करते हैं।

​सफर तो सफर है थक कर रुकना क्योंंं है ,

मंजिलें भी कदम चूमती हैै उनके जो कदम चार चलते हैं।

​वक्त है अभी अपनी सफर की तैयारी है,

अपनी तो फितरत है आसमां पर पांव रखते हैं।

​जो छोड़कर चले गए मुड़कर भी ना देखा  'प्रभात' हमको

क्यों उनसे मोहब्बत है उनका इंतज़ार करते हैं 

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