पुरुष:दो किनारे एक नदी के आपस में मिल पाते नहीं वक्त पड़ा हो जिनसे वो कभी आते नहीं
मैं ना उनको भुला सका उन्होंने मुझको भुला दिया
हाय! मैंने क्या किया, किस से ये प्यार किया
महिला:दो किनारे एक नदी के आपस में मिल पाते नहीं
वक्त पड़ा हो जिनसे वो कभी आते नहीं
मैं ना उनको भुला सकी उन्होंने मुझको भुला दिया
पुरुष: मिट गई खुशियां मेरी,़ चमन मेरा लुट गया।
पुरुष:हाय! मैंने क्या किया, किस से ये प्यार किया।
पुरुष: नदिया की धारा कहती है साहिल कभी सुनता नहीं
टूट जाए शीशा- ए-दिल
तो फिर कभी जुड़ता नहीं
महिला: मेरीआखों का सपना आंसू बनकर बह गया .........
मिट गई खुशियां मेरी, चमन मेरा लुट गया।
महिला:हाय मैंने क्या किया, किस से ये प्यार किया।
महिला:यादो की परछाइयां , दिल जलाती हैं यहाँ।
इक खामोश तन्हाई मुझको रुलाती है यहाँ
पुरुष:जो कभी अपना था वो, अब अजनबी सा हो गया
महिला:मिट गई खुशियां मेरी, चमन मेरा लुट गया
हाय! मैंने क्या किया, किस से ये प्यार किया
पुरुष:दरमियां दो दलों के फासले बढ़ते रहे
हम जमाने भर से, तन्हा ही लड़ते रहे
महिला:रेत पर दो नाम थे, सिर्फ नाम मेरा रह गया
मिट गई खुशियां मेरी चमन मेरा लुट गया
हाय! मैंने क्या किया किस से ये प्यार किया
महिला:हाथों की लकीरों में नाम तेरा था नहीं
मेरी परछाइयां साथ थी,साथ तेरा था नहीं
पुरुष:कुछ किसमत हमसे खफा थी, कुछ फासला ये बढ़ गया ।
महिला:मिट गई खुशियां मेरी चमन मेरा लुट गया
हाय! मैंने क्या किया किस से ये प्यार किया
महिला:इक खलिस दिल मे रही, क्या खता मुझसे हुई
कुछ तो कहो ओ किनारो, क्या खता दिल से हुई
पुरुष:मुस्कुराता दिल मेरा खामोश क्यों कर हो गया
(पुरुष,महिला युगल):मिट गई खुशियां मेरी चमन मेरा लुट गया
हाय!... मैंने क्या किया किस से ये प्यार किया
[Intro: Haunting Sarangi solo followed by a lonely Flute melody, Rain sound effects in the background]
[Verse 1: Male, Deep and Slow]
किनारे एक नदी के, आपस में मिल पाते नहीं
वक्त बुरा पड़ा हो जिनसे, वो कभी आते नहीं
[Verse 2: Female, Soft Whispery]
मैंने उनको न भुलाया, उन्होंने मुझको भुला दिया
[Chorus: Duet, Powerful Harmony]
(Harmonized) मिट गई खुशियां मेरी, चमन मेरा लूट गया
(Painful) हाय मैंने क्या किया... किस से ये प्यार किया!
[Interlude: Crying Violin and Soft Piano notes]
[Verse 3: Male, Emotional buildup]
नदिया की धारा कहती है, साहिल कभी सुनते नहीं
चकनाचूर हो जाए शीशा-ए-दिल, तो फिर कभी जुड़ता नहीं
[Verse 4: Female, Trembling voice]
मेरी आँखों का सपना, आँसू बनकर बह गया...
[Chorus: Duet]
मिट गई खुशियां मेरी, चमन मेरा लूट गया
हाय मैंने क्या किया, किस से ये प्यार किया!
[Outro: Minimal Piano, Male humming 'Hmmmm...', Fading into the sound of distant Thunder]
[End]
Intro]
[उदास सारंगी की धुन, पीछे हल्की बारिश और गरज की आवाज]
[Verse 1]
पुरुष: दो किनारे एक नदी के, आपस में मिल पाते नहीं
वक्त पड़ा हो जिनसे वह, कभी आते नहीं
महिला: मैं ना उनको भुला सकी, उन्होंने मुझको भुला दिया
[Chorus - साथ में]
(दोनों): मिट गई खुशियां मेरी, चमन मेरा लूट गया
(पुरुष): हाय मैंने क्या किया...
(महिला): किस से ये प्यार किया!
[Verse 2]
पुरुष: नदिया की धारा कहती है, साहिल कभी सुनता नहीं
चकनाचूर हो जाए शीशा-ए-दिल, तो फिर कभी जुड़ता नहीं
महिला: मेरी आँखों का सपना, आँसू बनकर बह गया...
[Chorus - साथ में]
(दोनों): मिट गई खुशियां मेरी, चमन मेरा लूट गया
(महिला): हाय मैंने क्या किया...
(पुरुष): किस से ये प्यार किया!
[Verse 3]
महिला: यादों की परछाइयां, दिल जलाती हैं यहाँ
इक खामोश तन्हाई, मुझको रुलाती है यहाँ
पुरुष: जो कभी अपना था वो, अब अजनबी सा हो गया
[Verse 4]
पुरुष: दरमियां दो दिलों के, फासले बढ़ते रहे
हम जमाने भर से, तन्हा ही लड़ते रहे
महिला: रेत पर दो नाम थे, सिर्फ नाम मेरा रह गया
[Verse 5]
महिला: हाथों की लकीरों में, नाम तेरा था नहीं
मेरी परछाइयों के साथ, साथ तेरा था नहीं
पुरुष: कुछ किस्मत हमसे खफा थी, कुछ फासला ये बढ़ गया
[Verse 6 -]
पुरुष: इक खलिश दिल में रही, क्या खता मुझसे हुई
महिला: कुछ तो कहो किनारो, क्या खता दिल से हुई
दोनों (करुण स्वर में): मुस्कुराता दिल मेरा, खामोश क्यों कर हो गया...
[Final Chorus]
(दोनों): मिट गई खुशियां मेरी, चमन मेरा लूट गया
(पुरुष): हाय मैंने क्या किया...
(महिला): किस से ये प्यार किया!
[Outro]
[बांसुरी की एक लंबी तान, पुरुष की धीमी गुनगुनाहट 'हूँ.... हूँ...', और अंत में बिजली कड़कने की आवाज़ के साथ संगीत धीमा होकर खत्म हो जाता है]
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