(Shayari)
सितारे भी ठहर गए हैं उस नक़ाब के दीदार को,
हवाएँ भी रुक गई हैं सुनने को दिल की पुकार को।
(Gaayan)
ए चाँद तू शर्माना छोड़ दे, हमें तड़पाना छोड़ दे,
या तू खुद कह दे हमसे कि यार अब ये ज़माना छोड़ दे।
शर्मो हया का पर्दा क्यों तूने किया है,
बेदर्दी सनम तूने जीना मुश्किल किया है,
अब ये भी कह दे कि मुस्कुराना छोड़ दे।
(Shayari)
सितारे भी ठहर गए हैं उस नक़ाब के दीदार को,
हवाएँ भी रुक गई हैं सुनने को दिल की पुकार को।
(Gaayan)
शर्मो हया का पर्दा क्यों तूने किया है,
बेदर्दी सनम तूने जीना मुश्किल किया है,
अब ये भी कह दे कि मुस्कुराना छोड़ दे।
ए चाँद तू शर्माना छोड़ दे, हमें तड़पाना छोड़ दे,
या तू खुद कह दे हमसे कि यार अब ये ज़माना छोड़ दे।
(Shayari)
अभी तो कली ने खिलने की सिर्फ हसरत दिखाई है,
मगर फिजाओं में महक अभी से कयामत लाई है।
(Gaayan)
नज़रों ही नज़रों में इशारे खूब करता है,
इशारों में कहता है कि हम पर मरता है,
ए महबूब मेरे मुझको आजमाना छोड़ दे।
ए चाँद तू शर्माना छोड़ दे, हमें तड़पाना छोड़ दे,
या तू खुद कह दे हमसे कि यार अब ये ज़माना छोड़ दे।
(Shayari)
अभी तो घूँघट की ओट है, और बेकरारी का ये आलम है,
ज़रा सोचो! दिल का क्या होगा, जब वह जलवा-ए-फिरोज़ होंगे।
(Gaayan)
इज़हार-ए-मोहब्बत सनम तू क्यों नहीं करता है,
क्या मेरी मोहब्बत से तुझे डर सा लगता है?
अगर यही सही है तो यह बहाना छोड़ दे।
ए चाँद तू शर्माना छोड़ दे, हमें तड़पाना छोड़ दे,
या तू खुद कह दे हमसे कि यार अब ये ज़माना छोड़ दे।
(Shayari)
ज़ालिम ने उलझन में डाल दिया है एक झलक दिखाकर,
खुदा खैर करे, जब ये शाम मुकम्मल दीदार की होगी।
(Gaayan)
घूँघट में चाँद जब शर्माए, दिल मेरा मुझसे कहे,
वक्त कुछ देर और रुक जाए...
वक्त भी नहीं है अब आने जाने का, ये सिलसिला छोड़ दे।
ए चाँद तू शर्माना छोड़ दे, हमें तड़पाना छोड़ दे,
या तू खुद कह दे हमसे कि यार अब ये ज़माना छोड़ दे।
(Shayari)
अभी तो कली ने खिलने की सिर्फ हसरत दिखाई है,
मगर फिजाओं में महक अभी से कयामत लाई है।
(Gaayan)
नज़रों ही नज़रों में इशारे खूब करता है,
इशारों में कहता है कि हम पर मरता है,
ए महबूब मेरे मुझको आजमाना छोड़ दे।
ए चाँद तू शर्माना छोड़ दे, हमें तड़पाना छोड़ दे,
या तू खुद कह दे हमसे कि यार अब ये ज़माना छोड़ दे।
(Shayari)
सितारे भी ठहर गए हैं उस नक़ाब के दीदार को,
हवाएँ भी रुक गई हैं सुनने को दिल की पुकार को।
(Gaayan)
ए चाँद तू शर्माना छोड़ दे, हमें तड़पाना छोड़ दे,
या तू खुद कह दे हमसे कि यार अब ये ज़माना छोड़ दे।
शर्मो हया का पर्दा क्यों तूने किया है,
बेदर्दी सनम तूने जीना मुश्किल किया है,
अब ये भी कह दे कि मुस्कुराना छोड़ दे।
ए चाँद तू शर्माना छोड़ दे, हमें तड़पाना छोड़ दे,
या तू खुद कह दे हमसे कि यार अब ये ज़माना छोड़ दे।
(Shayari)
अभी तो कली ने खिलने की सिर्फ हसरत दिखाई है,
मगर फिजाओं में महक अभी से कयामत लाई है।
(Gaayan)
नज़रों ही नज़रों में इशारे खूब करता है,
इशारों में कहता है कि हम पर मरता है,
ए महबूब मेरे मुझको आजमाना छोड़ दे।
ए चाँद तू शर्माना छोड़ दे, हमें तड़पाना छोड़ दे,
या तू खुद कह दे हमसे कि यार अब ये ज़माना छोड़ दे।
(Shayari)
अभी तो घूँघट की ओट है, और बेकरारी का ये आलम है,
ज़रा सोचो! दिल का क्या होगा, जब वह जलवा-ए-फिरोज़ होंगे।
(Gaayan)
इज़हार-ए-मोहब्बत सनम तू क्यों नहीं करता है,
क्या मेरी मोहब्बत से तुझे डर सा लगता है?
अगर यही सही है तो यह बहाना छोड़ दे।
(Gaayan)
ए चाँद तू शर्माना छोड़ दे, हमें तड़पाना छोड़ दे,
या तू खुद कह दे हमसे कि यार अब ये ज़माना छोड़ दे।
(Shayari)
ज़ालिम ने उलझन में डाल दिया है एक झलक दिखाकर,
खुदा खैर करे, जब ये शाम मुकम्मल दीदार की होगी।
(Gaayan)
घूँघट में चाँद जब शर्माए, दिल मेरा मुझसे कहे,
वक्त कुछ देर और रुक जाए...
वक्त भी नहीं है अब आने जाने का, ये सिलसिला छोड़ दे।
ए चाँद तू शर्माना छोड़ दे, हमें तड़पाना छोड़ दे,
या तू खुद कह दे हमसे कि यार अब ये ज़माना छोड़ दे।
(Shayari)
अभी तो घूँघट की ओट है, और बेकरारी का ये आलम है,
ज़रा सोचो! दिल का क्या होगा, जब वह जलवा-ए-फिरोज़ होंगे।
(Gaayan)
इज़हार-ए-मोहब्बत सनम तू क्यों नहीं करता है,
क्या मेरी मोहब्बत से तुझे डर सा लगता है?
अगर यही सही है तो यह बहाना छोड़ दे।
ए चाँद तू शर्माना छोड़ दे, हमें तड़पाना छोड़ दे,
या तू खुद कह दे हमसे कि यार अब ये ज़माना छोड़ दे।
(Shayari)
ज़ालिम ने उलझन में डाल दिया है एक झलक दिखाकर,
खुदा खैर करे, जब ये शाम मुकम्मल दीदार की होगी।
(Gaayan)
घूँघट में चाँद जब शर्माए, दिल मेरा मुझसे कहे,
वक्त कुछ देर और रुक जाए...
वक्त भी नहीं है अब आने जाने का, ये सिलसिला छोड़ दे।
ए चाँद तू शर्माना छोड़ दे, हमें तड़पाना छोड़ दे,
या तू खुद कह दे हमसे कि यार अब ये ज़माना छोड़ दे।
"ए चाँद तू शर्माना छोड़ दे,
हमें तड़पाना छोड़ दे,
या तू खुद कह दे हमसे
कि यार अब ये ज़माना छोड़ दे।
सितारे भी ठहर गए हैं उस नकाब के दीदार को,
हवाएँ भी रुक गई हैं सुनने को दिल की पुकार को
शर्मो हया का पर्दा
क्यों तूने किया है,
बेदर्दी सनम तूने
जीना मुश्किल किया है,
अब ये भी कह दे
कि मुस्कुराना छोड़ दे।
अभी तो कली ने खिलने की सिर्फ हसरत दिखाई है,
मगर फिजाओं में महक अभी से कयामत लाई है।
नज़रों ही नज़रों में
इशारे खूब करता है,
इशारों में कहता है
कि हम पर मरता है,
ए महबूब मेरे मुझको
आजमाना छोड़ दे
अभी तो घूँघट की ओट है, और बेकरारी का ये आलम है,
ज़रा सोचो! दिल का क्या होगा, जब वह जलवाा फिरोज होंगे
इज़हार-ए-मोहब्बत
सनम तू क्यों नहीं करता है
क्या मेरी मोहब्बत से
तुझे डर सा लगता है
अगर यही सही है तो
यह बहाना छोड़ दे
ज़ालिम ने उलझन में डाल दिया है एक झलक दिखाकर,
खुदा खैर करे, जब ये शाम मुकम्मल दीदार की होगी।
घूँघट में चाँद जब शर्माए,
दिल मेरा मुझसे कहे,
वक्त कुछ देर और रुक जाए
वक्त भी नहीं है अब
आने जाने का यह सिलसिला छोड़ दे
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