तमन्ना अगर कोई दिल मचलने की करता है,
किसी से किसी मक़ा पर मिलने की करता है।
हकीकत है ये उस दिल की,
बनाकर खुद को परवाना,
चाह जलने की करता है
मोहब्बत में कहा दिल को,
कभी आराम आया है
मोहब्बत गीत है ऐसा, क
भी हंस के कभी रोके,
दिल ने गाया है
नादान दिल मोहब्बत का,
क्यों एतबार करता है
तमन्ना अगर कोई दिल
मचलने की करता है,
किसी से किसी मक़ा पर
मिलने की करता है....
मोहब्बत का कभी कहां,
वो मुकाम आता है,
गीत मोहब्बत का,
कहाँ दिल को रास आता है
हकीकत जानकर भी,
मुकरने की कोशिश करता है।
तमन्ना अगर कोई दिलकिसी से किसी मक़ा पर
दिल से बार-बार पूछा
उसकी 'ख्वाहिश' क्या है?
बेवफा ने मुस्कुरा के कहा
आज़माइश क्या है?
मोहब्बत की है,
कोई गुनाह तो नहीं किया मैंने,
मुझे नादान कहता है
खुद ही नदानी करता है
मैंने इसे रोकना चाहा
आंखें मुझको दिखाता है
इसे दिलरुबा के ख्वाब
देखने में मजा आता है
ये सौदागर है
सौदे का
इजहार करता है
तेरी चाहत इसको,
ये तेरा इंतजार करता है
हसरत है इसे
कभी तो तुम इसे
बुलाओगी
बड़ा ज़िद्दी है ये दिल,
बड़ी-बडी हसरते करता है।
यह चाहत में अपना
वक्त बर्बाद करता है
तमन्ना जब भी कोई दिल
मचलने की करता है,
किसी से किसी मक़ा पर
मिलने की करता है।
यूँही तो कोई आरज़ू
दिल में पैदा नहीं होती,
किसी को पाने की चाह
कभी रुसवा नहीं होती।
जब ये चाह बन जाती है
अरमान एक दिल का
नादान दिल हर हद से
गुज़रने की ज़िद करता है।
तमन्ना जब भी कोई
दिल मचलने की करता है,
किसी से किसी मक़ा पर
मिलने की करता है।
देख कर दिल को लगा
बड़ा मायूस है ये,
हकीकत से फिर भी,
मुकरने की कोशिश करता है।
तमन्ना जब कोई दिल
मचलने की करता है,
किसी से किसी मक़ा पर
मिलने की करता है।
हकीकत है यह उसे दल की
बनाकर खद को परवाना
चाह जलने की करता है
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