Saturday, 21 February 2026

शान‌ इंसान की

शान इंसां की अल्लाह ने रखी, 
दौलते ग़म जहां में बख़्शा,
दिले मोहब्बत जहां में बख़्सी।
एक नेक इंसान ने खुदा से यह पूछा, 
ऐ खुदा मुझको इतना बता दे, 
इस जहां में और क्या क्या होगा
 कब मिटेगी यह दुनियादारी, 
दिन कयामत का कौन सा होगा।"
खुदा कहने लगा,
 "फ़क्र है मुझको ऐ बंदे तुझ पे, 
तूने पूछा है जो सवाल मुझसे, 
अब जवाब तू अपना सुन ले,
 दिन कयामत का तू याद कर ले।
दरो- दीवार से आवाज आए 
लड़कियां आबरू अपनी मिटाए
बिके गया  और सच्चाई
समझा मेरे बंदे तुझपे कयामत आई 
फरमान सुनाया अल्लाह ने 
इंसान की रक्खी अल्लाह ने 
इंसान ने पूछा मलिक क्या,
 तेरी यह दुनिया यूंही तबाह होगी 
क्या तेरी इस दुनिया पर इनायत नहीं होगी 
तू अगर चाहे तो समुंदर को भी सुखा
सकता है
तू अगर चाहेतो मेरे मौला पानी में आग लगा सकता है 
फिर तेरा नेक बंदा बेवजह इस आग में झुलसेगा
क्या करम  अपने बंदों पर मालिक नहीं करेगा 
खुदा ने फरमाया मैंने तुझे मोहब्बत के लिए बनाया है 
तूने तो नफरत को गले लगाया है 
फिर क्या हक है तुझे कि तू आज में कयामत की न जले 
और यह दुनिया यूं ही चलती चले 
मलिक सभी बंदे तो तेरे शैतान है नहीं कुछ भटक गए हैं वह नादान है इंसान है 
उन पर भी तुझे रहम फरमाना होगा 
अपने बंदों को सही राह पर लाना होगा 
  खुदा ने कहा जब वह मेरे सजदे में सर अपना झुका लेंगे 
है हकीकत यही हम उन्हें अपना बना लेंगे 
अगर वह नेकी  के रास्ते पर न चले 
कयामत को तो आना ही है
जो देख बंदे हैं उन्हें जन्नत अदा की जाएगी 
जो शैतान है उन्हें दोजक की आग में जलन होगा
ए खुदा बंदे हैं तेरे तेरी इनायत चाहते हैं 
हम तेरे सजदे में हैं तेरी रहमत चाहते हैं 
तू हमें अपना बना हम तेरी राह चले 
हमारी नेकी और तेरी रहमत से 
तेरी मौला यह कयामत त तले
 मेरे मौला यह कयामत टले
सजदे में सर झुकाया इंसा ने
तौबा की उसने हर गुनाह से 
इंसान से  मोहब्बत बांदा किया
यु रमजान का महीना उसने पूरा किया 
आई ईद तो मिले एक दूसरे से गले 
काश यह कयामत इसी तरह से टले
जकात और नवाज का पैगाम न गया जाएगा 
चले नेक की राह पर अगर हम 
तो दिन कभी कयामत का नहीं आएगा 
मां भी बेटे को लोरी मोहब्बत की सुनाएगी 
दुनिया में यूं ही मोहब्बत बढ़ती जाएगी


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