Intro]
(Haunting Bansuri melody with a deep, echoing reverb)
(Soft strokes of Tabla and Sarangi)
[Verse 1]
अपनों ने ही ला कर छोड़ा इन बदनाम गलियों में
लाज शर्म अब हमने छोड़ी इन बदनाम गलियों में
सच है यारा प्यार है धोखा, मिलता है जिसको ये मौका
खेलता है वह खेल अनोखा, तोड़ देता है दिल भी वो इन बदनाम गलियों में
[Chorus]
संग भी ना परछाई रहती, सब कुछ इतना काला है
सब कुछ मिलता है इन गलियों में, नहीं मिलता उजाला है
टूटती चूड़ी बहते आंसू, संग हमारे रहते हैं
इन बदनाम गलियों में, हम बेबस होकर बहते हैं
[Verse 2]
कोई पकड़ता हाथ यहां पर, कोई दामन से खेल रहा
मासूम दिल तन्हाई में रोता, कोई सहारा नहीं मिल रहा
रोज लगाई जाती है बोली, रोज सजाई जाती डोली
अपनी हर शाम दिवाली, अपनी सुबह होती है होली
[Bridge]
(Sad Violins and slow Cello buildup)
सपने टूटते इन आंखों के इन बदनाम गलियों में...
जिंदगी दम तोड़ती है रोज इन गुमनाम गलियों में...
[Outro/Makta]
मोल यहाँ जज्बात का होता, हर सांस यहाँ इक सौदा है
खुशी पराई सी लगती है इन बदनाम गलियों में
उम्मीद का सूरज डूबा जहाँ, उस मोड़ पे 'प्रभात' अब तुम देखो
वो रोते हैं, हंसता जमाना इन बदनाम गलियों में...
[End]
(Fading sound of a single Ghungroo and Bansuri)
Intro]
(Haunting Bansuri melody with a deep, echoing reverb)
(Soft strokes of Tabla and Sarangi)
[Verse 1]
अपनों ने ही ला कर छोड़ा इन बदनाम गलियों में
लाज शर्म अब हमने छोड़ी इन बदनाम गलियों में
सच है यारा प्यार है धोखा, मिलता है जिसको ये मौका
खेलता है वह खेल अनोखा, तोड़ देता है दिल भी वो इन बदनाम गलियों में
[Chorus]
संग भी ना परछाई रहती, सब कुछ इतना काला है
सब कुछ मिलता है इन गलियों में, नहीं मिलता उजाला है
टूटती चूड़ी बहते आंसू, संग हमारे रहते हैं
इन बदनाम गलियों में, हम बेबस होकर बहते हैं
[Verse 2]
कोई पकड़ता हाथ यहां पर, कोई दामन से खेल रहा
मासूम दिल तन्हाई में रोता, कोई सहारा नहीं मिल रहा
रोज लगाई जाती है बोली, रोज सजाई जाती डोली
अपनी हर शाम दिवाली, अपनी सुबह होती है होली
[Bridge]
(Sad Violins and slow Cello buildup)
सपने टूटते इन आंखों के इन बदनाम गलियों में...
जिंदगी दम तोड़ती है रोज इन गुमनाम गलियों में...
[Outro/Makta]
मोल यहाँ जज्बात का होता, हर सांस यहाँ इक सौदा है
खुशी पराई सी लगती है इन बदनाम गलियों में
उम्मीद का सूरज डूबा जहाँ, उस मोड़ पे 'प्रभात' अब तुम देखो
वो रोते हैं, हंसता जमाना इन बदनाम गलियों में...
[End]
(Fading sound of a single Ghungroo and Bansuri)
Intro]
(Haunting Bansuri melody with a deep, echoing reverb)
(Soft strokes of Tabla and Sarangi)
[Verse 1]
अपनों ने ही ला कर छोड़ा इन बदनाम गलियों में
लाज शर्म अब हमने छोड़ी इन बदनाम गलियों में
सच है यारा प्यार है धोखा, मिलता है जिसको ये मौका
खेलता है वह खेल अनोखा, तोड़ देता है दिल भी वो इन बदनाम गलियों में
[Chorus]
संग भी ना परछाई रहती, सब कुछ इतना काला है
सब कुछ मिलता है इन गलियों में, नहीं मिलता उजाला है
टूटती चूड़ी बहते आंसू, संग हमारे रहते हैं
इन बदनाम गलियों में, हम बेबस होकर बहते हैं
[Verse 2]
कोई पकड़ता हाथ यहां पर, कोई दामन से खेल रहा
मासूम दिल तन्हाई में रोता, कोई सहारा नहीं मिल रहा
रोज लगाई जाती है बोली, रोज सजाई जाती डोली
अपनी हर शाम दिवाली, अपनी सुबह होती है होली
[Bridge]
(Sad Violins and slow Cello buildup)
सपने टूटते इन आंखों के इन बदनाम गलियों में...
जिंदगी दम तोड़ती है रोज इन गुमनाम गलियों में...
[Outro/Makta]
मोल यहाँ जज्बात का होता, हर सांस यहाँ इक सौदा है
खुशी पराई सी लगती है इन बदनाम गलियों में
उम्मीद का सूरज डूबा जहाँ, उस मोड़ पे 'प्रभात' अब तुम देखो
वो रोते हैं, हंसता जमाना इन बदनाम गलियों में...
[End]
(Fading sound of a single Ghungroo and Bansuri)
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